"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
चतुर्थ भव्य डाक कावड़ यात्रा २०२६ जत्था